भारत की जनता को स्वस्थ रखने के लिए स्वच्छ भारत मिशन

भारत की जनता को स्वस्थ रखने के लिए स्वच्छ भारत मिशन-स्वच्छ भारत मिशन (SBM) केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह आधुनिक भारत के इतिहास का सबसे बड़ा जन-आंदोलन है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में शुरू किया गया यह अभियान स्वच्छता को एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी से बढ़ाकर एक राष्ट्रीय गौरव का विषय बना चुका है।

स्वच्छ भारत मिशन क्या है?

स्वच्छ भारत मिशन भारत सरकार द्वारा संचालित एक राष्ट्रव्यापी अभियान है, जिसका उद्देश्य गलियों सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना और कूड़ा साफ रखना है। इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई दिल्ली के राजपथ से की गई थी।

इस मिशन के दो मुख्य घटक हैं-

  •   स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) –  आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित।
  •   स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) –  जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित।

मिशन के मुख्य उद्देश्य

स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य केवल झाड़ू लगाना नहीं है बल्कि इसके उद्देश्य अत्यंत गहरे हैं

  • खुले में शौच मुक्त (ODF) भारत – व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करके देश को खुले में शौच की कुप्रथा से मुक्त करना।
  • ठोस कचरा प्रबंधन –  कचरे का 100% वैज्ञानिक तरीके से निपटान और पुनर्चक्रण (Recycling) करना।
  • जन जागरूकता – स्वच्छता के प्रति लोगों के व्यवहार और सोच में बदलाव लाना।
  • हाथ से मैला ढोने की प्रथा का अंत – सफाई व्यवस्था को आधुनिक और सम्मानजनक बनाना।

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सुलभ शौचालय की भूमिका (The Role of Public Toilets)

सुलभ शौचालय और सामुदायिक स्वच्छता परिसरों ने इस मिशन की सफलता में रीढ़ की हड्डी का काम किया है।

पहुंच और सुविधा – भीड़भाड़ वाले बाजारों, बस स्टैंडों और झुग्गी बस्तियों में सुलभ शौचालयों ने महिलाओं और बच्चों को एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण विकल्प प्रदान किया है।

स्वास्थ्य सुरक्षा – सुलभ शौचालयों के कारण जलजनित बीमारियों जैसे हैजा, टाइफाइड में भारी कमी आई है।

आर्थिक मॉडल – सुलभ इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर सरकार ने पे एंड यूज मॉडल को बढ़ावा दिया जिससे इन शौचालयों का रखरखाव स्वयं-सस्टेनेबल हो गया।

कचरा प्रबंधन (Waste Management) और इसके लाभ

स्वच्छ भारत मिशन ने कचरे को गंदगी नहीं बल्कि संसाधन (Resource) के रूप में देखना सिखाया है।

  • पृथक्करण (Segregation) – घर-घर से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
  • वेस्ट-टू-एनर्जी – कचरे से बिजली और खाद बनाने के प्लांट लगाए गए।
  • प्लास्टिक मुक्त भारत – एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-use plastic) के खिलाफ सख्त अभियान चलाया गया
  • आर्थिक लाभ –  कचरा प्रबंधन से ‘स्वच्छता उद्यमी’ पैदा हुए हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर खुले हैं।

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व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तन

इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि व्यवहार परिवर्तन (Behavioral Change) है।

  • शर्म से सम्मान तक –  पहले शौचालय घर से बाहर होना प्रतिष्ठा मानी जाती थी अब घर के अंदर शौचालय होना सम्मान का प्रतीक बन गया है।
  • बच्चों की भूमिका – बच्चे अब ‘स्वच्छता दूत’ बन गए हैं। वे बड़ों को सड़क पर कचरा फेंकने से टोकते हैं।
  • सामुदायिक स्वामित्व – लोग अब अपने मोहल्ले की सफाई को अपनी जिम्मेदारी समझने लगे हैं।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सहायता

क्षेत्रसहायता का स्वरूप 
ग्रामीण (Gramin) घर-घर शौचालय बनाने के लिए ₹12,000 की वित्तीय सहायता। पानी की आपूर्ति और सामुदायिक सोखते गड्ढों (Soak pits) का निर्माण।
|शहरी (Urban) डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, स्मार्ट डस्टबिन, कचरा प्रसंस्करण इकाइयां और ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ के माध्यम से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा। 

आपको प्रेरित करने वाली कुछ महत्वपूर्ण बातें

यदि आप एक स्वस्थ और समृद्ध भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो इन बिंदुओं को आत्मसात करें-

स्वास्थ्य ही धन है – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के कारण हर साल भारत में 3 लाख से अधिक मौतें डायरिया और कुपोषण से रोकी जा सकी हैं।

देश की छवि –  एक स्वच्छ देश विदेशी निवेश और पर्यटन को आकर्षित करता है जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

समानता – स्वच्छता अभियान ने जातिगत भेदभाव को कम करने और सफाई कर्मचारियों को समाज में सम्मान दिलाने का काम किया है।

स्वच्छता मंत्र – “न मैं गंदगी करूँगा, न मैं किसी को करने दूँगा।”

क्या होगी आपकी भूमिका

स्वच्छ भारत मिशन का दूसरा चरण (SBM 2.0) अब ODF Plus और कचरा मुक्त शहरों  पर केंद्रित है। इसे सफल बनाने के लिए हमें

  •  अपने कचरे को गीले और सूखे में बांटना चाहिए।
  •  सार्वजनिक स्थानों पर थूकने और कचरा फैलाने से बचना चाहिए।
  •   वृक्षारोपण और जल संरक्षण को स्वच्छता का हिस्सा बनाना चाहिए।
  • जब आप अपने घर के साथ-साथ अपनी गली को भी अपना समझेंगे तभी भारत वास्तव में स्वस्थ भारत बनेगा।

कैसे हुई है स्वच्छ भारत मिशन (SBM) की शुरुआत 

इस मिशन के अंतर्गत शहरों और राज्यों के बीच स्वच्छता को लेकर एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) की शुरुआत 2016 में की गई।

जब हम पहले नंबर.की बात करते हैं तो इसे दो श्रेणियों में देखा जाता है-  सबसे स्वच्छ शहर और सबसे स्वच्छ राज्य

स्वच्छ भारत मिशन-  शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों का इतिहास

स्वच्छ सर्वेक्षण में राज्यों की रैंकिंग मुख्य रूप से दो श्रेणियों में दी जाती है – 100 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) वाले राज्य और 100 से कम ULBs वाले राज्य।

महाराष्ट्र (Maharashtra)

महाराष्ट्र वर्तमान में भारत का सबसे स्वच्छ राज्य बना हुआ है।

  • उपलब्धि-  स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 और हालिया 2024-25 की घोषणाओं में महाराष्ट्र ने देश के सबसे स्वच्छ राज्य का खिताब हासिल किया है।
  • कारण – यहाँ के शहरों जैसे नवी मुंबई और पुणे ने कचरा प्रबंधन और सफाईमित्र सुरक्षा में वैश्विक मानक स्थापित किए हैं।

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)

मध्य प्रदेश स्वच्छता के मामले में सबसे सुसंगत (Consistent) राज्य रहा है।

  • उपलब्धि.- यह राज्य कई बार शीर्ष 3 में रहा है और 2022 में देश का सबसे स्वच्छ राज्य चुना गया था।
  • इंदौर का जादू.- मध्य प्रदेश की इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय इंदौर को जाता है जो लगातार 8 बार 2017 से 2024-25 तकभारत का सबसे स्वच्छ शहर रहा है।
  • विशेषता – मध्य प्रदेश ने कचरा पृथक्करण (Segregation) और 100% कचरा प्रसंस्करण (Processing) में महारत हासिल की है।

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)

छत्तीसगढ़ ने इस मिशन के शुरुआती वर्षों में अपना दबदबा बनाए रखा था।

  • उपलब्धि –  छत्तीसगढ़ ने लगातार तीन साल (2019, 2020 और 2021) देश के सबसे स्वच्छ राज्य 100 से अधिक ULBs श्रेणी का पुरस्कार जीता।
  • सफलता का मंत्र – छत्तीसगढ़ का अम्बिकापुर शहर कचरे से कंचन (Waste to Wealth) मॉडल के लिए दुनिया भर में मशहूर हुआ। यहाँ गारबेज कैफे जैसे नवाचार शुरू किए गए थे।

झारखंड (Jharkhand)

झारखंड ने कम शहरी निकायों (Less than 100 ULBs) वाली श्रेणी में अपनी विशेष पहचान बनाई है।

  • उपलब्धि –  यह राज्य 2018, 2019, 2020 और 2021 में अपनी श्रेणी में नंबर 1 रहा है।
  • प्रयास-  झारखंड ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ओडीएफ (Open Defecation Free) लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया।

वर्षवार सबसे स्वच्छ राज्यों की सूची (शीर्ष स्थान)

वर्ष सबसे स्वच्छ राज्य (100 निकाय) 
2018झारखंड (समग्र प्रदर्शन) 
2019छत्तीसगढ़ और झारखंड 
2020छत्तीसगढ़ और झारखंड 
2021छत्तीसगढ़ और झारखंड 
2022मध्य प्रदेश और त्रिपुरा 
2023महाराष्ट्र  और मध्य प्रदेश (दूसरे स्थान पर) 
2024-25 महाराष्ट्र 

राज्यों की सफलता के पीछे के मुख्य कारक

इन राज्यों के पहले नंबर पर आने के पीछे कुछ ठोस कारण रहे हैं- 

  • कचरे का स्रोत पर पृथक्करण –  इंदौर और सूरत जैसे शहरों ने नागरिकों को घर पर ही गीला और सूखा कचरा अलग करने के लिए प्रेरित किया।
  •  लैंडफिल फ्री सिटीज – कचरा मुक्त शहर (Star Rating for Garbage Free Cities) के तहत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने अपने शहरों को डंपिंग यार्ड से मुक्त बनाया।
  •  नागरिक भागीदारी –  इन राज्यों ने स्वच्छता को सरकारी कार्यक्रम से बदलकर एक ‘जन आंदोलन’ बना दिया।
  •  सफाईमित्र सुरक्षा – सफाई कर्मचारियों के लिए मशीनीकृत सफाई और उनकी सुरक्षा (Manhole to Machinehole) पर विशेष जोर दिया गया।

स्वच्छ भारत मिशन के प्रारंभ से ही छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच शीर्ष स्थान के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रही है। जहाँ छत्तीसगढ़ ने 2019-21 के दौरान हैट्रिक बनाई वहीं मध्य प्रदेश ने इंदौर के माध्यम से अपनी निरंतरता बनाए रखी। वर्तमान में महाराष्ट्र इस दौड़ में सबसे आगे निकल गया है।

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